आजसू के केंद्रीय उपाध्यक्ष प्रवीण प्रभाकर ने जेपीएससी फर्जीवाड़े में कार्रवाई पर सवाल उठाया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि छोटी मछलियों को फंसाने और बड़ी मछलियों को बचाने का प्रयास हो रहा है। जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते के आवास पर छापामारी के विवरण का खुलासा क्यों नहीं किया गया है? उनकी गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई है? पहले भी राज्य सरकार ने चर्चित शराब घोटाले में सीबीआई जांच नहीं करवाई और बड़ी मछलियों को बचा लिया। इसलिए स्पष्ट है कि सीबीआई जांच के बिना सच्चाई सामने नहीं आएगी।
श्री प्रभाकर ने कहा कि पूर्व अध्यक्ष श्री खियांग्ते पर ही फर्जीवाड़ा का मुख्य सूत्रधार होने का आरोप लग रहा है, जिसकी पुष्टि उनके आवास पर छापामारी से हो गई। जेपीएससी में उनकी मनमानी और तानाशाही चल रही थी। जेपीएससी के अन्य सदस्यों को किनारे कर दिया गया था और खियांग्ते का गिरोह कार्य कर रहा था। इसलिए ब्लैकलिस्टेड एजेंसी से ही पूरा कार्य करवाया जा रहा था।
श्री प्रभाकर ने कहा कि पूर्व में भी राज्य सरकार ने चर्चित शराब घोटाले में सीबीआई की बजाय राज्य की एजेंसियों से जांच कराई थी और बड़ी मछलियों की बचा लिया था। अब चौदहवीं जेपीएससी प्रकरण में भी वही कार्यशैली अपनाई जा रही है, जिससे यह आशंका और गहरी हो जाती है कि भ्रष्टाचार में संलिप्त लोगों को संरक्षण देने का प्रयास किया जा रहा है। यदि हेमंत सरकार निष्पक्ष है, तो उसे सीबीआई जांच से परहेज क्यों है?
श्री प्रभाकर ने कहा कि सिविल सेवा ही नहीं जेट, एपीपी, सिविल जज, वन विभाग समेत सभी परीक्षाएं संदेह के दायरे में हैं। अभ्यर्थियों और अभिभावकों की मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानियों की भरपाई कौन करेगा?






