रांची, 21 जुलाई 2026: पुलिस मुख्यालय सभागार में मंगलवार को पूर्वी क्षेत्रीय परिषद समन्वय समिति (ERPCC-2026) की बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित हुई। बैठक में झारखंड की पुलिस महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक श्रीमती तदाशा मिश्र ने बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशकों के साथ हिस्सा लिया।
बैठक में अंतर्राज्यीय अपराधों की रोकथाम, नक्सल उन्मूलन, मादक पदार्थों की तस्करी, साइबर अपराध नियंत्रण, रेलवे सुरक्षा तथा जीरो एफआईआर व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई।
पुलिस महानिदेशक ने कहा कि झारखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में नक्सली गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए संयुक्त अभियान, नियमित सूचना साझा करने और राज्यों के बीच समन्वय बैठकें आवश्यक हैं, ताकि माओवादी गतिविधियों के पुनर्गठन की किसी भी संभावना को समय रहते रोका जा सके।
मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए संयुक्त चेकपोस्ट, रियल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग, तस्करी नेटवर्क की बैकवर्ड-फॉरवर्ड लिंकिंग की जांच, NCORD पोर्टल के प्रभावी उपयोग तथा सिंथेटिक ड्रग्स नेटवर्क के खिलाफ समन्वित कार्रवाई पर भी जोर दिया गया।
साइबर अपराध के मोर्चे पर राज्यों ने रियल-टाइम डेटा शेयरिंग, संयुक्त जांच, फर्जी सिम कार्ड और म्यूल अकाउंट्स पर कार्रवाई, साझा साइबर अपराधी डेटाबेस तैयार करने, प्रत्येक राज्य में नोडल अधिकारी नियुक्त करने तथा संयुक्त क्षमता निर्माण कार्यक्रम नियमित रूप से चलाने पर सहमति जताई।
बैठक में जीरो एफआईआर के पंजीकरण और राज्यों के बीच उसके आदान-प्रदान में आने वाली तकनीकी चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। विशेष रूप से Cri-MAC पोर्टल और CCTNS के बेहतर एकीकरण, ऑनलाइन ट्रैकिंग व्यवस्था तथा न्यायालयी प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए भारत सरकार और संबंधित एजेंसियों को आवश्यक सुझाव भेजने पर सहमति बनी।
बैठक के अंत में झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के पुलिस प्रमुखों ने संगठित अपराध, नक्सलवाद, मादक पदार्थों की तस्करी, रेल सुरक्षा और साइबर अपराध के विरुद्ध संयुक्त एवं समन्वित कार्रवाई जारी रखने का संकल्प दोहराया।
मुख्य बिंदु
- पांच राज्यों के पुलिस प्रमुखों की ERPCC-2026 बैठक।
- नक्सलवाद के खिलाफ संयुक्त अभियान और नियमित समन्वय पर जोर।
- ड्रग्स तस्करी रोकने के लिए संयुक्त चेकपोस्ट और रियल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग।
- साइबर अपराधियों का साझा डेटाबेस और फर्जी सिम-म्यूल अकाउंट्स पर कार्रवाई।
- जीरो एफआईआर प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए तकनीकी सुधारों पर सहमति।






