रांची, 24 जुलाई। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शुक्रवार को झारखंड मंत्रालय में उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने अवैध शराब के निर्माण, भंडारण, परिवहन और तस्करी पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए। साथ ही विभाग में रिक्त पदों पर जल्द नियुक्ति, नई मदिरा विनिर्माण नीति तैयार करने और आधुनिक तकनीक के उपयोग पर जोर दिया।
बैठक में मुख्यमंत्री ने वित्तीय वर्ष 2025-26 की उपलब्धियों और 2026-27 की कार्ययोजना की समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2025-26 में विभाग ने 3,885.11 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 4,013.53 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया। वहीं चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 4,500 करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें जुलाई मध्य तक 1,376 करोड़ रुपये (30.57%) की वसूली हो चुकी है।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि राज्य में अवैध शराब के कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि अवैध शराब न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि लोगों के जीवन और स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा है।
उन्होंने विभाग के रिक्त पदों पर जल्द बहाली का निर्देश देते हुए कहा कि झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के माध्यम से नियुक्ति प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए। अधिकारियों ने बताया कि 583 उत्पाद सिपाहियों की नियुक्ति की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
मुख्यमंत्री ने मदिरा परिवहन वाहनों में GPS ट्रैकिंग और डिजिटल लॉक लगाने के निर्देश दिए, ताकि वाहनों की रियल-टाइम निगरानी हो सके और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।
इसके अलावा उन्होंने राज्य के विभिन्न जिलों में उत्पाद विभाग के गोदामों के निर्माण में स्थानीय आदिवासी समुदाय को प्राथमिकता देने, स्पिरिट की खपत का व्यापक अध्ययन करने तथा नई मदिरा विनिर्माण एवं औद्योगिक अल्कोहल नीति तैयार करने के निर्देश भी दिए।
बैठक में उत्पाद एवं मद्य निषेध मंत्री योगेंद्र प्रसाद, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, प्रधान सचिव अमिताभ कौशल, उत्पाद आयुक्त संदीप सिंह सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।






