रांची: मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने सोमवार को झारखंड मंत्रालय में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने राज्य के सभी वन क्षेत्रों का एक माह के भीतर टेक्निकल एवं डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने का निर्देश दिया, ताकि एक क्लिक पर पूरे राज्य के वन क्षेत्रों की स्थिति, सीमाएं और विकास कार्यों की जानकारी उपलब्ध हो सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की पहचान उसकी प्राकृतिक संपदा, घने जंगलों, वन्यजीवों और समृद्ध जैव विविधता से है। इसलिए वन संरक्षण, वैज्ञानिक प्रबंधन और सतत विकास राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में हैं।
बैठक में मुख्यमंत्री ने उपयोगिता आधारित और स्थानीय इको सिस्टम के अनुरूप पौधारोपण पर जोर देते हुए महुआ, जामुन, करंज, पलाश, कुसुम, अर्जुन, बैर, कटहल, आंवला और चिरौंजी जैसे स्थानीय एवं आर्थिक रूप से लाभकारी पौधों के बड़े पैमाने पर रोपण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीणों की आय, लाह एवं तसर उद्योग और पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने वन पट्टा के लंबित मामलों का शीघ्र निष्पादन करने, पात्र लाभुकों को समय पर पट्टा उपलब्ध कराने और योजनाओं के पारदर्शी क्रियान्वयन पर विशेष बल दिया। साथ ही काजू और बांस की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने और बांस आधारित उद्योगों के माध्यम से रोजगार सृजन पर फोकस करने का निर्देश दिया।
उन्होंने झारखंड में इको-टूरिज्म की असीम संभावनाओं का उल्लेख करते हुए वन एवं पर्यटन विभाग को समन्वय के साथ बेहतर कार्ययोजना तैयार करने को कहा। साथ ही हाथियों के हमलों से प्रभावित परिवारों को मुआवजा भुगतान में तेजी लाने और हेलीकॉप्टर से बीज बिखेरकर वन विकास की योजना तैयार करने के निर्देश भी दिए।
मुख्यमंत्री ने “एक पेड़ लगाओ, पांच यूनिट मुफ्त बिजली पाओ” योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने को कहा, ताकि अधिक से अधिक लोग पर्यावरण संरक्षण के इस अभियान से जुड़ सकें।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने दुमका, जामताड़ा और कोडरमा के वन प्रमंडल पदाधिकारियों से ऑनलाइन संवाद कर वन पट्टा, पौधारोपण, इको-टूरिज्म और अन्य योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और जनविश्वास ऐप के प्रभावी संचालन पर भी अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।






