सकारात्मक परिवर्तनों को आत्मसात करना समय की मांग : परमजीत कौर

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राँची:- कैंब्रियन पब्लिक स्कूल, कांके रोड में शनिवार को ‘विद्यालयों के लिए कंप्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की समझ’ पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। सीबीएसई के द्वारा विद्यालयों में डिस्ट्रिक्ट लेवल डिलीवरी के तहत आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य शैक्षणिक लीडर्स और शिक्षकों को साथ-साथ लाना है, ताकि विद्यार्थियों के बीच कंप्यूटेशनल थिंकिंग और एई तत्परता को बढ़ावा देने के लिए उभरती हुई शिक्षण पद्धतियों, पाठ्यक्रम एकीकरण और नवीन दृष्टिकोण पर चर्चा की जा सके। कार्यशाला में विभिन्न विद्यालयों के बारह प्रतिनिधियों ने अपना रिसर्च प्रस्तुत किया। शिक्षकों ने समस्याओं को छोटे और तार्किक हिस्सों में तोड़कर उनका समाधान खोजना, पैटर्न पहचान और एल्गोरिथम तैयार करने के साथ-साथ छात्रों को मशीन लर्निंग और न्यूरल नेटवर्क समझाने की तकनीकों पर अपने अनुसंधान और जानकारियां साझा की। इससे पहले विद्यालय की निदेशक सह प्राचार्या श्रीमती परमजीत कौर, मुख्य वक्ता झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सुभाष चंद्र यादव, बीआईटी मेसरा के सहायक प्रोफेसर श्री के० श्रीधर पटनायक, एसआर डीएवी के प्राचार्य डॉ० तापस घोष और एकेपीएफआई के सहायक प्रोफेसर डॉ० प्रतीक विश्वास ने दीप प्रज्वलित कर कार्यशाला का उद्घाटन किया। विद्यालय की निदेशक सह प्राचार्या श्रीमती परमजीत कौर ने कार्यशाला में शामिल प्रतिनिधियों और निर्णायकों का स्वागत किया। मौके पर उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ सकारात्मक परिवर्तनों को आत्मसात करके ही संस्कृतियां विकास पथ पर अग्रसर होती है। कंप्यूटेशनल थिंकिंग और एआइ वर्तमान शिक्षण पद्धति की मांग है। इनके विवेकपूर्ण उपयोग से बच्चों में तार्किकता और रचनात्मकता विकसित होगी। उन्होंने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पाठ्यक्रम को ज्यादा रोचक, सरल और नवाचारों के प्रयोग के साथ -साथ अनुभवों को साझा करने पर जोर देती है।मुख्य वक्ता प्रो० सुभाष चंद्र यादव ने कहा कि कंप्यूटेशनल थिंकिंग समस्या समाधान का एक मानव केंद्रित दृष्टिकोण है जो मस्तिष्क को समस्याओं की तार्किक चरणों में विभाजित करने के लिए प्रशिक्षित करती है और मशीन तथा एआई उन्हें निष्पादित करते हैं। उन्होंने कहा कि कंप्यूटेशनल थिंकिंग रेसिपी और एआई एक शेफ की तरह है। कार्यक्रम का संचालन शिक्षिका सीमा चंद्रिका तिवारी ने किया। कार्यशाला में विभिन्न विद्यालयों के प्रतिनिधि, प्राचार्य एवं शिक्षक शामिल हुए।

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