शिक्षक और विद्यार्थी दोनों ही गुरु-शिष्य परम्परा के मूल्यों का संवहन करें: परमजीत कौर
भारतीय शास्त्रों में गुरु का स्थान सर्वश्रेष्ठ है। गुरु वह है जो अज्ञानता के अंधकार को दूर कर विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक, आध्यात्मिक और चारित्रिक उत्थान का सोपान तैयार करता है। उक्त बातें कैंब्रियन पब्लिक स्कूल, कांके रोड में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम ‘ गुरु वंदन ‘ में विद्यालय की निदेशक सह प्राचार्या श्रीमती परमजीत कौर ने कहा। उन्होंने कहा कि भारत में अनादि काल से गुरु -शिष्य परंपरा चली आ रही है। शिक्षक एवं विद्यार्थी दोनों ही इस परंपरा के मूल्यों को समझे और उनका संवहन करें। इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना और सामूहिक गीत ‘गुरुवे नमः’ से हुई। छात्रा सिद्धि प्रिया ने गुरु पूर्णिमा की तिथि के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रतिष्ठा और श्रेया ने गुरु की महिमा पर आधारित कविता पाठ किया। बच्चों ने गुरु नमन और गुरु को समर्पित आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किया।छात्र परिषद के प्रतिनिधियों ने निदेशक को ग्रीटिंग कार्ड भेंट किया। बच्चों के द्वारा शिक्षकों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करने के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।






