रांची: मानसून के दौरान बढ़ी नमी और संक्रमण के कारण कान, नाक और गले (ईएनटी) से जुड़ी बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। ऐसे मौसम में थोड़ी सी लापरवाही भी फंगल इंफेक्शन, सर्दी-जुकाम, गले में खराश और कान के संक्रमण जैसी समस्याओं का कारण बन सकती है। इसे लेकर अरुणीशा ईएनटी हॉस्पिटल, काटाटोली के कंसल्टेंट ईएनटी सर्जन डॉ. अरुण कुमार ने लोगों, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले किसान भाइयों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।
डॉ. अरुण कुमार ने बताया कि ओटोमाइकोसिस (Otomycosis) कान का एक सामान्य फंगल इंफेक्शन है, जिसमें कान में खुजली, भारीपन, दर्द या सुनने में परेशानी हो सकती है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर लोग अक्सर ईयरबड या किसी नुकीली वस्तु से कान साफ करने की कोशिश करते हैं, जो नुकसानदायक हो सकता है।
उन्होंने सलाह दी कि ऐसी स्थिति में स्वयं कान साफ करने के बजाय तुरंत किसी ईएनटी विशेषज्ञ से संपर्क करें। आवश्यकता होने पर सक्शन मशीन से सुरक्षित तरीके से कान की सफाई की जाती है, जिससे संक्रमण बढ़ने का खतरा कम होता है।
डॉ. अरुण कुमार ने कहा कि बारिश में भीगने के बाद गीले कपड़ों को देर तक पहनकर न रहें और उन्हें तुरंत बदल लें। जिस कमरे में आप सोते हैं, वहां गीले कपड़े न रखें, क्योंकि नमी संक्रमण को बढ़ावा देती है।
उन्होंने आगे कहा कि यदि सर्दी-जुकाम या गले में खराश की समस्या हो, तो ठंडी और फ्रिज की चीजों से परहेज करें। गुनगुना या गर्म पानी पिएं और नियमित रूप से गर्म पानी की भाप लें। इससे गले और श्वसन तंत्र को राहत मिलती है तथा संक्रमण का खतरा कम होता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले किसानों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि खेतों में काम करते समय यदि बारिश में भीग जाएं, तो स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें और किसी भी तरह की ईएनटी संबंधी परेशानी को नजरअंदाज न करें।
डॉ. अरुण कुमार ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को कान, नाक या गले से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्या महसूस हो, तो बिना देर किए विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। समय पर जांच और उचित उपचार से अधिकांश बीमारियों का प्रभावी इलाज संभव है।
अरुणीशा ईएनटी हॉस्पिटल
📍 पता: काटाटोली, रांची
🕐 ओपीडी समय: प्रतिदिन दोपहर 1:00 बजे से शाम 8:00 बजे तक






